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गाइड

डिजिटल मतदान के लिए GDPR की शर्तें

मतदान कराने का मतलब है निजी डेटा संभालना - कम से कम इतना कि कौन वोट देने का हकदार है। इस गाइड में आसान भाषा में बताया गया है कि मतदान ऑनलाइन ले जाने पर GDPR आपसे क्या उम्मीद करता है।

मतदान में निजी डेटा

मतदान में सबसे साफ़ निजी डेटा होता है मतदाता सूची: उन लोगों की सूची जो वोट देने के हकदार हैं, आम तौर पर नाम और संपर्क जानकारी के साथ। मतपत्र खुद निजी डेटा होना ही नहीं चाहिए, क्योंकि ठीक से बनी व्यवस्था में वह गुमनाम होता है और उसे किसी व्यक्ति से जोड़ा नहीं जा सकता।

कानूनी आधार और कम से कम डेटा

मतदाता सूची को प्रोसेस करने के लिए आपके पास कानूनी आधार होना चाहिए - अक्सर यह अपनी गवर्नेंस चलाने का वाजिब हित होता है, या कोई कानूनी या वैधानिक बाध्यता। कम से कम डेटा लेना यहाँ सबसे अहम है - सिर्फ़ उतना जुटाएँ जितना योग्यता पक्की करने और मतदाताओं से संपर्क करने के लिए चाहिए, उससे ज़्यादा कुछ नहीं।

गोपनीयता, डेटा रखना और मिटाना

मतपत्र की गोपनीयता GDPR के साथ अपने आप बैठ जाती है। अगर कोई मतपत्र को किसी मतदाता से जोड़ ही नहीं सकता, तो सबसे संवेदनशील डेटा मौजूद ही नहीं होता। तय करें कि मतदाता सूची और प्रमाण-संग्रह कब तक रखने हैं, और जब निजी डेटा की ज़रूरत न रहे तो उसे मिटा दें।

प्रोसेसर, होस्टिंग और पारदर्शिता

अगर कोई प्लेटफ़ॉर्म आपकी ओर से डेटा प्रोसेस करता है, तो वह डेटा प्रोसेसर है और आपके पास उसके साथ करार होना चाहिए। EU में होस्टिंग और साफ़ दस्तावेज़ से अनुपालन आसान होता है, और मतदाताओं को साफ़-साफ़ बताया जाना चाहिए कि उनका डेटा कैसे इस्तेमाल होता है।

मुख्य बातें

  • मतदाता सूची निजी डेटा है, गुमनाम मतपत्र नहीं।
  • कानूनी आधार तय करें और सिर्फ़ ज़रूरी डेटा जुटाएँ।
  • मतपत्र की गोपनीयता संवेदनशील डेटा घटाकर GDPR में मदद करती है।
  • डेटा रखने की अवधि तय करें और ज़रूरत खत्म होने पर डेटा मिटा दें।
  • ऐसा प्लेटफ़ॉर्म चुनें जो साफ़ तौर पर डेटा प्रोसेसर हो और EU में होस्टिंग दे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

इसे अपने संगठन में देखें

देखें कि सुरक्षित और सत्यापन योग्य मतदान आपके जैसे संगठन में कैसे फ़िट बैठता है।

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