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EBSI और DAVINCI का मेल: UPC ने निजी छात्र मतदान के लिए यूरोपीय blockchain इन्फ़्रास्ट्रक्चर कैसे इस्तेमाल किया

अगर छात्र सिर्फ़ अपने विश्वविद्यालय के पहचान पत्र से किसी बाध्यकारी चुनाव में वोट डाल सकें, वह भी पूरी गोपनीयता और सत्यापन क्षमता के साथ और बिना कुछ डाउनलोड किए, तो कैसा हो? UPC और DAVINCI प्रोटोकॉल ने ठीक यही कर दिखाया। पूरा केस स्टडी अब उपलब्ध है।

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Lucas

· पढ़ने में 6 मिनट

EBSI और DAVINCI का मेल: UPC ने निजी छात्र मतदान के लिए यूरोपीय blockchain इन्फ़्रास्ट्रक्चर कैसे इस्तेमाल किया

जब कोई विश्वविद्यालय ऐसा मतदान कराना चाहे जिसमें सिर्फ़ उसके अपने छात्र हिस्सा ले सकें, कोई यह न देख सके कि किसने किसे वोट दिया, और हर मतपत्र की स्वतंत्र रूप से जाँच हो सके, और यह सब सिर्फ़ उन्हीं क्रेडेंशियल से हो जो छात्रों के पास पहले से हैं, तो क्या होता है?

Universitat Politècnica de Catalunya (UPC) में हुए एक अवधारणा-प्रमाण (proof of concept) ने ठीक इसी सवाल का जवाब खोजा। यह काम DAVINCI प्रोजेक्ट के भीतर, Xavier López Mañes के स्नातकोत्तर शोध के तहत हुआ, और यह दिखाता है कि संस्थागत पहचान व्यवस्थाएँ blockchain-आधारित मतदान से जुड़कर निजी, सुरक्षित और सत्यापन योग्य चुनाव कैसे करा सकती हैं।

मुख्य तथ्य

  • संगठन: Universitat Politècnica de Catalunya (UPC)
  • प्रोजेक्ट: DAVINCI प्रोटोकॉल
  • तरीका: जोड़ने के दो अलग रास्ते आज़माए गए (EBSI विकेंद्रित पहचान + संस्थागत विकल्प)
  • पहचान-पुष्टि: विश्वविद्यालय के आम क्रेडेंशियल
  • मतदान परत: Vocdoni SDK के साथ DAVINCI प्रोटोकॉल
  • परिणाम: end-to-end सत्यापन क्षमता के साथ चालू छात्र मतदान

चुनौती: पहचान और गोपनीयता का टकराव

चुनाव कराने वाली हर संस्था के सामने एक खिंचाव रहता है। आपको यह पक्का करना होता है कि हर मतदाता वही है जो वह खुद को बताता है, और वह पात्र समूह में आता है। पर साथ ही उसका मतपत्र गुप्त भी रखना होता है। ये दोनों शर्तें उलटी दिशाओं में खींचती हैं। आप पहचान जितनी ज़्यादा जाँचेंगे, गोपनीयता बचाना उतना ही मुश्किल होता जाएगा।

UPC की टीम ने एक ऐसी प्रणाली बनाई जो पहचान की परत और मतदान की परत को अलग रखकर इस खिंचाव को खत्म कर देती है। आप कौन हैं, यह विश्वविद्यालय संभालता है। आप क्या वोट डालते हैं, यह मतदान प्रोटोकॉल संभालता है। किसी भी पक्ष को दूसरे पर आँख मूँदकर भरोसा नहीं करना पड़ता, क्योंकि एक क्रिप्टोग्राफ़िक प्रमाण निजी जानकारी बताए बिना दोनों को जोड़ देता है।

एक ही मंज़िल, दो रास्ते

इस अवधारणा-प्रमाण में जोड़ने के दो तरीके आज़माए गए। दोनों का ढाँचा बुनियादी तौर पर एक ही है: छात्र उन्हीं क्रेडेंशियल से अपनी पहचान बताते हैं जो वे कैंपस में रोज़ इस्तेमाल करते हैं, और मतदान प्रणाली को क्रेडेंशियल नहीं, सिर्फ़ पात्रता का एक क्रिप्टोग्राफ़िक प्रमाण मिलता है।

फ़र्क सिर्फ़ इसमें है कि पहचान की परत कैसे खड़ी की जाती है।


पहला चरण: EBSI के साथ जुड़ाव

पहले चरण का लक्ष्य European Blockchain Services Infrastructure (EBSI) के साथ पूरा जुड़ाव था। यह यूरोपीय आयोग का अनुमति-आधारित blockchain ढाँचा है, जो भरोसेमंद डिजिटल सेवाओं के लिए बना है। EBSI से UPC जैसी संस्थाएँ सत्यापन योग्य क्रेडेंशियल जारी कर सकती हैं, जिन्हें छात्र अपने निजी वॉलेट से जोड़ सकते हैं, और फिर यह जाँचा जा सकता है कि वे क्रेडेंशियल अधिकृत समूह के किसी खास सदस्य के ही हैं।

छात्र का अनुभव कुछ ऐसा रहा:

  1. पहचान-पुष्टि: छात्र EBSI नेटवर्क पर मौजूद UPC इशूअर के ज़रिए अपने आम विश्वविद्यालय क्रेडेंशियल से लॉगिन करता है।
  2. क्रेडेंशियल लेना: इशूअर एक QR कोड बनाता है, जिससे छात्र अपने क्रेडेंशियल पर हस्ताक्षर करके उन्हें अपने ही वॉलेट में डाल लेता है।
  3. पात्रता साबित करना: मतदान शुरू होने पर छात्र अपने वॉलेट से UPC वेरिफ़ायर के सामने पहचान साबित करता है। वेरिफ़ायर जाँचता है कि वॉलेट किसी अधिकृत छात्र का है, और एक मतदाता सूची प्रमाण बना देता है।
  4. मतपत्र डालना: छात्र DAVINCI SDK के ज़रिए अपना वोट भेजता है, और साथ में मतदाता सूची प्रमाण भी लगा होता है।

यह ढाँचा एक साथ दो बातों की गारंटी देता है: छात्र उन्हीं क्रेडेंशियल से अपनी पहचान बताते हैं जो वे रोज़ इस्तेमाल करते हैं, और वे क्रेडेंशियल कभी संस्था के दायरे से बाहर नहीं जाते। प्रणाली उपयोगकर्ता का असली पहचान डेटा देखे बिना ही पात्रता साबित कर देती है।

भरोसे का त्रिकोण। UPC जारीकर्ता के तौर पर धारक, यानी एक छात्र, को सत्यापन योग्य क्रेडेंशियल देता है, जिसे छात्र अपने डिजिटल वॉलेट में रखता है, और छात्र आगे वेरिफ़ायर, यानी DAVINCI के क्रेडेंशियल सेवा प्रदाता, को सत्यापन योग्य प्रस्तुति भेजता है।

समाधान के हिस्से

यह क्यों मायने रखता है: EBSI को इस तरह बनाया गया है कि वह देशों की सरहदों के आर-पार काम कर सके। UPC का जारी किया कोई क्रेडेंशियल, सिद्धांत रूप में, यूरोप भर की दूसरी संस्थाओं के कराए चुनावों में वोट डालने के काम आ सकता है। लंबी दौड़ का लक्ष्य यही है।

यह क्यों रुक गया: तकनीकी पक्ष काम कर गया। सभी हिस्से बनाए और परखे गए। पर EBSI के पीछे खड़ी संचालक संस्थाओं से मंज़ूरी मिलने में इतना वक्त लगता कि प्रोजेक्ट की समय-सीमा के भीतर यह जुड़ाव पूरा करना मुमकिन नहीं रहा। तकनीक तैयार थी। गवर्नेंस नहीं।


दूसरा चरण: संस्थागत विकल्प

जब EBSI की तरफ़ से समय पर बात नहीं बनी, तो टीम ने अपना दायरा बदल लिया। और असल कहानी यहीं से शुरू होती है, क्योंकि यहाँ DAVINCI प्रोटोकॉल का लचीलापन सामने आता है।

EBSI इशूअर की जगह UPC की अपनी चलाई हुई एक सेवा ने ले ली। छात्रों की पहचान संभालने और गोपनीयता बचाने की पूरी ज़िम्मेदारी विश्वविद्यालय पर ही रही। प्रोटोकॉल के ढाँचे में कोई बदलाव नहीं करना पड़ा, बस पहचान का स्रोत बदल गया।

बदला हुआ तरीका:

  1. छात्र किसी वेब एप्लिकेशन के ज़रिए एक अस्थायी वॉलेट बनाता है।
  2. अपने विश्वविद्यालय क्रेडेंशियल से लॉगिन करते ही यह वॉलेट उसकी संस्थागत पहचान से जुड़ जाता है।
  3. मतदान शुरू होने पर वॉलेट UPC वेरिफ़ायर के सामने पहचान साबित करता है, और वेरिफ़ायर मतदाता सूची प्रमाण बना देता है।
  4. छात्र DAVINCI SDK के ज़रिए अपना वोट डालता है।

फ़र्क यह है: छात्र की नज़र से अनुभव लगभग वही रहता है। संस्था की नज़र से इसे खड़ा करना कम पेचीदा है, क्योंकि बाहरी blockchain गवर्नेंस पर कोई निर्भरता नहीं रहती। पहचान की पूरी परत सीधे विश्वविद्यालय के हाथ में रहती है।

यह नहीं बदला: मतदान निजी ही रहता है, मतपत्र सत्यापन योग्य ही रहते हैं, और हिस्सा सिर्फ़ पात्र छात्र ही ले सकते हैं।

चुनाव कराने वाली संस्थाओं के लिए यह क्यों मायने रखता है

यह अवधारणा-प्रमाण एक व्यावहारिक दायरा सामने रखता है। एक सिरे पर EBSI जैसे ढाँचों से मिलने वाली पूरी तरह विकेंद्रित पहचान है, जिसका इनाम सरहदों के आर-पार चलने की क्षमता है। दूसरे सिरे पर एक आसान संस्थागत मॉडल है, जिसमें संगठन अपनी पहचान की परत खुद संभालता है। एक ही प्रोटोकॉल दोनों को संभाल लेता है।

यह हर उस संस्था के काम की बात है जो चुनाव कराती है और अपनी मतदाता सूची खुद संभालती है, जैसे विश्वविद्यालय, पेशेवर निकाय, ट्रेड यूनियन और सरकारी विभाग। इसका मतलब है कि आप मतदाताओं को उन्हीं क्रेडेंशियल से भागीदारी का रास्ता दे सकते हैं जो उनके पास पहले से हैं, और वह भी उस blockchain नेटवर्क पर जो आपके हालात में सही बैठे (सार्वजनिक L1, L2, या अनुमति-आधारित), और इसके लिए गोपनीयता या संस्थागत नियंत्रण गँवाना नहीं पड़ता।

DAVINCI प्रोटोकॉल और DAVINCI SDK इस तरह बनाए गए हैं कि वे पहचान और मतपेटी के बीच खड़े रहें, और दोनों को डिज़ाइन से ही अलग रखें।


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